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स्कूली वाहनों की जांच शुरू, 28 तक जिलों को देनी है रिपोर्ट

लखनऊ : गाजियाबाद स्कूल बस हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश भर के स्कूली वाहनों की फिटनेस जांचने का विशेष अभियान शुक्रवार से शुरू हो गया। एक हफ्ते के विशेष अभियान में स्कूली बस व स्कूल वैन की फिटनेस की जांच के साथ ही स्कूली वाहनों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश की भी पड़ताल की जाएगी। 28 अप्रैल तक सभी जिलों को अपने यहां की जांच रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय में भेजने का समय दिया गया है। परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों को पत्र भेजकर स्कूली वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए विशेष अभियान को पूरी गंभीरता से चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान जिले में पंजीकृत शत-प्रतिशत स्कूली वाहनों की जांच की जाए। मानक के अनुरूप न मिलने वाले वाहनों को किसी भी कीमत पर चलने न दिया जाए। ऐसे वाहन स्वामियों को अपने-अपने वाहन मानक के अनुरूप पूर्ण कराकर फिर से जांच कराने के बाद ही संचालन की अनुमति दी जाए। स्कूली वाहनों की फिटनेस जांचने के लिए पिछले साल अक्टूबर व नवंबर में चले अभियान में 33 जिलों के अफसरों ने लापरवाही बरती थी।


यह हैं सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशा-निर्देश ’स्कूल बस पीले रंग से होनी चाहिए पेंट, इसके आगे व पीछे स्कूल बस होना चाहिए बस लिखा ’बस के आगे व पीछे स्कूल आन ड्यूटी हो लिखा ’सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल लगी हो ’बस में आग बुझाने के हों पर्याप्त इंतजाम ’स्कूल बस पर स्कूल का नाम व उसका फोन नंबर जरूर होना चाहिए लिखा ’बस में स्कूल का एक सहायक भी होना चाहिए

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