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आयकर के नियमों में हुआ बदलाव : टैक्स-फ्री नहीं रही पीएफ से हासिल आय, पांच लाख से अधिक के अंशदान पर मिलने वाले ब्याज पर लगेगा टैक्स

 आयकर के नियमों में हुआ बदलाव : टैक्स-फ्री नहीं रही पीएफ से हासिल आय, पांच लाख से अधिक के अंशदान पर मिलने वाले ब्याज पर लगेगा टैक्स

 नए वित्त वर्ष में आयकर केनियमों में बदलाव हुआ है। अप्रैल से लागू नई व्यवस्था केतहत पांच लाख रुपये से अधिक की जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ गया है। अबतक रही व्यवस्था केअनुसार प्रोविडेंट फंड (पीएफ) मद में जमा राशि के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता था। कोई भी व्यक्ति वर्ष में पीएफ और अन्य बीमा में ढाई लाख रुपये तक के निवेश पर छूट हासिल कर लेता था। पीएफ मद में जमा कराई जाने वाली राशि और उस पर ब्याज को पूरी तरह टैक्स के दायरे के बाहर माना जाता था। अब सरकार ने पीएफ पर पांच लाख रुपये तक के सालाना योगदान पर मिलने वाले ब्याज को एक खास वर्ग के लिए टैक्स फ्री कर दिया है। हालांकि अगर पीएफ अकाउंट में कंपनी का अंशदान नहीं है तो सालाना ढाई लाख रुपये जमा पर हासिल ब्याज ही टैक्स मुक्त रहेगा।


आयकर नियमों में इस बदलाव से मोटी सेलरी वाले करदाता ही ज्यादा प्रभावित होंगे। देरी से यानि बिलेटेड और रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय सीमा घटा दी गई है। अब इसे 31 मार्च के स्थान पर 31 दिसंबर कर दिया गया है। सामान्य रूप में किसी वित्त वर्ष में आयकर रिटर्न अगले वित्त वर्ष (आकलन वर्ष) के 31 जुलाई तक और शुल्क के साथ 31 मार्च तक फाइल करना होता था। लेकिन अब 31 मार्च की तिथि घटाकर 31 दिसंबर कर दी गई है।

नए नियमों के अनुसार 2.5 लाख से ज्यादा वाले यूलिप लिंक्ड इंश्योरेंस पालिसी में टैक्स छूट नहीं रहेगा। यानि यूलिप के लिए सालाना प्रीमियम 2.5 लाख रपये से ज्यादा है तो मैच्योरिटी की रकम टैक्स के दायरे में आएगी। कुछ खास मामलों को छोड़कर आइटीआर पाइल होने के तीन वर्ष बाद इन्हें दोबारा नहीं खोला जा खोला जा सकेगा। यानि रिटर्न फाइल करने के तीन साल बाद टैक्स के मामले नहीं खोले जा सकेंगे। पहले आयकर विभाग के पास छह वर्षो तक कभी भी स्क्रूटनी शुरू करने का अधिकार था।

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