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लाख प्रयासों के बाद भी सरकारी स्कूलों के महज 3% बच्चों की ही हो पा रही है ऑनलाइन पढ़ाई, यह रही मुख्य वजह

 लाख प्रयासों के बाद भी सरकारी स्कूलों के महज 3% बच्चों की ही हो पा रही है ऑनलाइन पढ़ाई, यह रही मुख्य वजह

लखनऊ: प्राइमरी स्कूलों के करीब 3% बच्चों की ही ऑनलाइन पढ़ाई हो पा रही है।

कहीं बच्चों के परिजनों के पास स्मार्ट मोबाइल नहीं है तो कहीं इसे चलाने के लिए नेटवर्क डाटा नहीं है।

टेलीविजन से भी पढ़ाई नहीं हो पा रही है। क्योंकि प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले 95 ्र्रप्रतिशत गरीब बच्चों के घरों में टीवी ही नहीं है।

लखनऊ छोड़ अन्य जिलों में प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के घरों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं है।

बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राइमरी तथा जूनियर कक्षाओं के बच्चों के लिए टेलीविजन के साथ-साथ ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कराई हैं।

ऑनलाइन कक्षाएं व्हाट्सएप के जरिए चल रही हैं। अभिभावकों के व्हाट्सएप नंबर पर प्रिंट मैटेरियल भेजा जा रहा है।



हिन्दुस्तान ने राजधानी में चल रही ऑनलाइन पढ़ाई की पड़ताल की। 60 से ज्यादा शिक्षकों तथा विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली।

शिक्षकों तथा अधिकारियों ने खुद माना कि लखनऊ ही नहीं पूरे प्रदेश में बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं। उनके परिवारीजनों के पास स्मार्टफोन नहीं है।

जिनके पास है उनके पास नेटवर्क डाटा नहीं रहता है। शिक्षकों ने बताया कि वह खुद बच्चों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन 2 से 3% से अधिक बच्चे व्हाट्सएप से नहीं जुड़ पा रहे हैं।



खंड शिक्षा अधिकारी मान रहे कि न के बराबर पढ़ रहे बच्चे
राजधानी के एक खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि 20 मई से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए प्रयास में लगे हैं। लेकिन अभी तक जो रिपोर्ट मिल रही है उसमें न के बराबर ही पढ़ाई हो पा रही है।
टेलीविजन व व्हाट्सअप के जरिए पढ़ाई हो रही है। बच्चे टेलीविजन से रोज पढ़ रहे हैं।

शिक्षक भी इसमें लगे हुए हैं। रोजाना उनकी कक्षाएं टीवी पर नौ बजे से एक बजे तक चलती हैं। लखनऊ में अच्छे से पढ़ाई हो रही है।
पीएन सिंह, बीएसए

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