Header Ads

एक से बदलेंगी प्राइमरी में कक्षा एक की किताबें, अब कक्षा एक में चलेंगी तीन किताबें

 एक से बदलेंगी प्राइमरी में कक्षा एक की किताबें, अब कक्षा एक में चलेंगी तीन किताबें

कहीं एक बुढ़िया थी, जिसका नाम नहीं था कुछ भी, वह दिन भर खाली रहती थी, काम नहीं था कुछ भी। काम न होने से उसको आराम नहीं था कुछ भी, दोपहरी दिन रात-सवेरे शाम नहीं थी कुछ भी।

यह प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक में एक अप्रैल से पढ़ाई जाने वाली हिंदी की नई किताब रिमझिम की एक कविता है। पहले की तरह बच्चों को अब इस कविता को रटना नहीं होगा, बल्कि बुढ़िया का नाम रखना होगा। वह दिन भर खाली रहती थी, उसके लिए बच्चों को कुछ काम सुझाना होगा। फिर बच्चों को बताना होगा कि उनके अपने घर में सबसे ज्यादा काम कौन करता है। कक्षा एक की नई किताब की यह इकलौती ऐसी कविता है जो एक्टिविटी पर आधारित है। ऐसी 16 बॉल कविताएं हैं जो बच्चों के परिवेश से जुड़ी हैं । इसमें बच्चों को न लिखना होगा न ही रटना। उन्हें केवल बताना और सुझाना होगा। किताब में एक चित्रकथा आम की कहानी भी है। इसके साथ नौ सरल रोचक कहानियां भी हैं।

पक्षियों, जानवरों और खेल से संबंधित यह कहानियां बच्चों के मनोनुकूल हैं । यह कहानियां बच्चों की तर्कशक्ति, चिंतन और कल्पना शक्ति का ज्यादा विकास कर सकेंगी। 10 चित्र पाठ भी हैं, जिनसे बच्चों को नए तरीके से पढ़ाने व सिखाने का प्रयास किया गया है।


अब कक्षा एक में चलेंगी तीन किताबें

अभी तक कक्षा एक में कलरव नाम से केवल एक किताब चलती थी। यह किताब 116 पेज की होती थी। पर अब कक्षा एक में तीन किताबें चलेंगी। इसमें हिंदी की किताब होगी रिमझिम-एक। इसमें 124 पेज हैं। दूसरी होगी गणित का जादू । तीसरी किताब है अंग्रेजी की मैरीगोल्ड,

जिसमें 122 पेज हैं। तीनों किताबें एनसीईआरटी की हैं। गणित, हिंदी और अंग्रेजी तीनों किताबों में चित्रों को ज्यादा महत्व दिया गया है। इसी आधार पर बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया गया है।

कैपिटल की जगह स्माल लेटर से शुरू होगी पढ़ाई 
अभी तक स्कूलों में बच्चों को सबसे पहले अंग्रेजी के कैपिटल लेटर की पहचान कराई जाती थी। उसे ही सबसे पहले बच्चों को लिखवाया जाता था। लेकिन अब उन्हें सबसे पहले स्माल लेटर की पहचान कराई जाएगी और इसे लिखना भी बताया जाएगा क्योंकि सभी जगह स्माल लेटर का ज्यादा इस्तेमाल होता है।



नहीं मिलेगा होमवर्क
बच्चों को अब कोई भी होमवर्क नहीं मिलेगा। नए सत्र से 75 दिनों तक स्कूल में भी उन्हें लिखने का कोई काम नहीं दिया जाएगा। किताब के चित्रों तथा एक्टिविटी के माध्यम से उन्हें सिखाया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं