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शिक्षक भर्ती के नाम पर सोशल मीडिया चंदा बना धंधा:- बेसिक शिक्षा में भर्ती आने और इसके हर चरण में कोर्ट जाना कोई नई बात नहीं

शिक्षक भर्ती के नाम पर सोशल मीडिया चंदा बना धंधा:- बेसिक शिक्षा में भर्ती आने और इसके हर चरण में कोर्ट जाना कोई नई बात नहीं

शिक्षक भर्ती के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए चंदा जुटाने का खेल जोरों पर है। कानूनी लड़ाई का भरोसा दिलाकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से चंदा बसूला जा रहा है। इनमें से कई याची ऐसे हैं जिन्हें नौकरी मिली हो या नहों लेकिन कोई नवा स्कूल खोलकर मैनेजर बन गया तो कोई किसी पार्टी का नेता। कोई चंदे से जुटाए पैसों से ठेकेदार बनकर तीन-चार गाड़ियों से घूम रहा है। इनमें से कुछ शिक्षक भी हैं, जो बच्चों को तो ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं लेकिन चंदे के खेल में वे खाता जारी कर याची बनते हैं और कमाई का हिस्सा उन्हें भी मिलता है। एक व्यक्ति तो ऐसा है जिसका नाम 2014 से अब तक बेसिक की जितनी भी शिक्षक भर्ती आई, मसलन 16448, 12460, 68500 और 69000 इन सब में उसका नाम जरूर मिलेगा।

2014 बैच के एक बीटीसी डिग्रीधारक ने ट्रेनिंग पूरी होने के बाद चंदे की कमाई से लगभग 10 बीघा जमीन खरीदी। अब वहां स्कूल बनाकर प्रबंधक बन गया है। कई चार पहिया गाड़ी भी रख ली है। 2012 बैच के एक बीटीसी प्रशिक्षु का भी काम मीटिंग का आयोजन और पैसे जुटाना है। जिस भी मुद्दे पर केस बने केस करो, पैसे बनाओ। यह अलग बात है कि इनमें से शायद ही कोई केस जीता या नहीं।


कुछ गिने-चुने लोगों ने प्रत्येक शिक्षक भर्ती में केस करके पैसा कमाने को व्यवसाय बना लिया है। धीरे-धीरे कुछ समय में ये लोग एक शिक्षक की वार्षिक आय के बराबर प्रत्येक केस से कमाई करके अपना कार्य सिद्ध करने लगते हैं। कुछ ही दिन में नेता, ठेकेदार के रूप में या जमीन खरीदकर शिक्षा माफिया के रूप में दिखाई देते है। ये हमारे समाज में एक कोरोना विषाणु बन चुके हैं जो लाइलाज हैं और लोग इनके साथ जी भी रहे हैं। -रोहित पाठक, 69000 शिक्षक भर्ती के आवेदक
अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए अभ्यर्थियों से पैसे वसूलते हैं। जाति विशेष को गुमराह करके खाते जारी करने वालों से सावधान रहें। मेरी सलाह है कि यदि आपके हित और अधिकार का हनन हो रहा है तो बेशक आप आवाज उठाइये लेकिन कमाई करने वालों से उचित दूरी बनाकर रखें। मेरा सरकार से अनुरोध है कि ऐसे लोगों के खातों और चल-अचल संपत्ति के साथ इनके आय-व्यय की भी जांच की जानी चाहिए। अभ्यर्थी जब भी किसी के माध्यम से केस करे तो उस व्यक्ति से कुल आय-व्यय की जानकारी निरंतर लें और सावधान रहें। -संजीव त्रिपाठी, 68500 भर्ती में चयनित शिक्षक