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साथी शिक्षकों से वसूली करने वाला प्राइमरी का मास्टर निलंबित, जानिए कैसे करता था यह काम

 साथी शिक्षकों से वसूली करने वाला प्राइमरी का मास्टर निलंबित, जानिए कैसे करता था यह काम

साथी शिक्षकों से स्कूल न आने की एवज में हर माह धनराशि वसूलने वाले निघासन के शिक्षक को बीएसए ने के निलंबित कर दिया है।


आरोप है कि शिक्षकों के सीसीएल, मेडिकल व एरियर भुगतान कराने के नाम पर भी शिक्षकों से आनलाइन धनराशि अपने खाते में डलवाने वाले शिक्षक की शिकायत महानिदेशक बेसिक शिक्षा व बीएसए से की गई। बीएसए ने जांच के लिए टीम गठित की टीम ने नोटिस देकर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा। स्पष्टीकरण न देने पर बीएसए डा. लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने निलंबत कर दिया है।

बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने बताया कि सुमित कुमार सिंह निवासी ग्राम बदलापुर जौनपुर ने महानिदेशक बेसिक शिक्षा व उनसे शिकायत की कि प्राथमिक स्कूल चौगुर्जी निघासन में तैनात सहायक शिक्षक रोहित कुमार ने ब्लॉक के शिक्षकों से स्कूल न आने की एवज में धनराशि वसूलने का आरोप लगाया।

में अलावा मेडिकल, सीसीएल व एरियर दिलवाने के नाम पर भी वसूली की गई। लाखों रुपए रोहित के बैंक खाते में ऑनलाइन ली गई है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बीएसए ने बीईओ मुख्यालय सुभाष चन्द व सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी गिरिजा शंकर को जांच सौंपी। जांच टीम ने 20 दिसम्बर को शिक्षक को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा। बीएसए ने बताया कि शिक्षक ने न तो स्पष्टीकरण दिया और न ही टीम के सामने प्रस्तुत हुआ इस पर शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बीएसए ने बताया कि सीसीएल, मेडिकल एरियर व विद्यालय न आने की एवज में शिक्षकों से अपने खाते में ऑनलाइन धनराशि लेने, विभाग की छवि धूमिल करने के आरोप में शिक्षक रोहित को निलंबित कर दिया गया है। बीईओ मुख्यालय सुभाष व सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी से विस्तृत जांच कर आख्या मांगी गई है।


बीईओ पर भी उठ रहे हैं सवाल

स्कूल न आने की एवज में शिक्षकों से हर महीने अपने खाते में ऑनलाइन धनराशि लेने के आरोप में शिक्षक को निलंबित किया गया। इसके अलावा सीसीएल, एरियर व मेडिकल में भी वसूली का आरोप है। बताया जाता है कि बिना बीईओ की मिलीभगत से शिक्षक कैसे इन साथी शिक्षकों से वसूली करता रहा। क्या बीईओ को इसकी जानकारी ही नहीं लगी कि शिक्षक ब्लॉक के ही शिक्षकों से वसूली कर रहा है। अगर मामले की विस्तृत जांच या दूसरे विभाग से जांच कराई जाए तो और मामले भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल विभाग अभी शिक्षक की ही जांच करा रहा है।

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