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स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक वाले जूनियर शिक्षक भर्ती से बाहर, कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे प्रभावित अभ्यर्थी: 72825 भर्ती में मिल चुकी है राहत

 स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक वाले जूनियर शिक्षक भर्ती से बाहर, कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे प्रभावित अभ्यर्थी: 72825 भर्ती में मिल चुकी है राहत

अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में 1894 प्रधानाध्यापकों एवं सहायक अध्यापकों की भर्ती से उन अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया है जिनके स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक हैं। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने आवेदन शुरू होने के बाद वेबसाइट पर बिना तारीख के नोटिस चस्पा कर दी है कि स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक होने की स्थिति में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन न करें।


साथ ही ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने स्नातक में 50 प्रतिशत अंक नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन आवेदन किया है उनके आवेदन पत्र निरस्त माने जाएंगे और भर्ती परीक्षा में सम्मिलित नहीं किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी है। सचिव ने इस अर्हता के लिए 18 फरवरी के शासनादेश और उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाईस्कूल) (अध्यापकों की भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियमावली 1978 (सातवां संशोधन) नियमावली 2019 की अधिसूचना 4 दिसंबर 2019 का हवाला दिया है।

हालांकि अभ्यर्थियों का तर्क है कि बीएड के नियम समय-समय पर बदलते रहे हैं और ऐसे तमाम अभ्यर्थी हैं जिन्होंने स्नातक में 50 फीसदी अंक नहीं होने के बावजूद परास्नातक में 50 प्रतिशत नंबर के आधार पर बीएड किया है। गौरतलब है कि आवेदन शुरू होने के 11 दिनों में दो लाख से अधिक अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं और एक लाख से अधिक फॉर्म अंतिम रूप से जमा हो चुके हैं।

72825 भर्ती में मिल चुकी है राहत

स्नातक में 50 फीसदी से कम अंक वाले अभ्यर्थियों का मामला परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में भी उठा था। इन अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और उन्हें राहत मिली। सरकार को 50 प्रतिशत से कम अंक वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देना पड़ा था।

कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे प्रभावित अभ्यर्थी

एडेड जूनियर हाईस्कूल की भर्ती में स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक होने पर बाहर किए जा रहे अभ्यर्थी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। अभ्यर्थियों मनीष कुमार, राकेश कुमार यादव, प्रियंका वर्मा, अनिल कुमार, अजय गुप्ता, आनंद कुमारी तिवारी आदि का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने उन्हें बीएड में प्रवेश की अनुमति दी थी। अब उन्हें बाहर करना नाइंसाफी है।

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