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यूनीफार्म वितरण: चुनिंदा फर्म को टेंडर दिलाने का ‘खेल’, दबी जुबान से शिक्षकों में है असंतोष, यूनीफार्म विक्रेताओं द्वारा दबाव बनाने का आरोप

यूनीफार्म वितरण: चुनिंदा फर्म को टेंडर दिलाने का ‘खेल’, दबी जुबान से शिक्षकों में है असंतोष, यूनीफार्म विक्रेताओं द्वारा दबाव बनाने का आरोप

प्रयागराज : परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को स्कूल यूनीफार्म वितरित करने के लिए सभी विद्यालय प्रबंध समिति के बैंक खातों में राशि भेजने के साथ चुनिंदा फर्म को टेंडर दिलाने का ‘खेल’ भी शुरू हो गया है।

शासन की तरफ से भेजी रकम से प्रत्येक बच्चे को दो सेट (शर्ट-पैंट) यूनीफार्म उपलब्ध कराना है। एक बच्चे पर 600 रुपये खर्च किये जाने की व्यवस्था है। पिछले दिनों वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से बेसिक शिक्षाधिकारी को भेजे पत्र में आरोप लगाया गया कि यूनीफार्म वितरण का केंद्रीयकरण कर एक निश्चित फर्म से यूनीफार्म वितरण के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कौंधियारा, चाका, उरुवा, करछना, जसरा, मांडा आदि के शिक्षकों का कहना है कि मीटिंग बुलाकर एक निश्चित फर्म का कपड़ा लेने को कोटेशन दिलाकर बांटने का दबाव है। हालांकि कोई भी शिक्षक खुलकर सामने नहीं आ रहा है। कुछ यूनीफार्म विक्रेताओं ने शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी से भी मुलाकात की थी। वैचारिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने भी बताया कि उनके पास कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने पत्र लिखकर महानिदेशक स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश व शिक्षा निदेशक बेसिक से अनुरोध किया है कि स्वेटर, जूता, मोजा, किताबों की तरह यूनीफार्म भी सरकारी टेंडर के जरिए वितरित कराई जाएं।


अभी मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है। यह जरूर है कि कोरोना संकट के चलते शासन की मंशा के अनुरूप स्थानीय स्तर पर महिला समूहों से यूनीफार्म की सिलाई करवाने का निर्देश है। उसके अनुसार कदम भी उठाए जा रहे हैं।
संजय कुशवाहा, बेसिक शिक्षाधिकारी।

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