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सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं खारिज, प्रदेश में जारी रहेगी 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती, कोर्ट ने की यह टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं खारिज, प्रदेश में जारी रहेगी 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती, कोर्ट ने की यह टिप्पणी


उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की चल रही भर्ती जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर पुस्तिकाओं में खामियों के आधार पर भर्ती पर रोक की मांग करने वाली करीब आधा दर्जन याचिकाएं मंगलवार को खारिज कर दीं। 24 जून को भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले से संबंधित कुछ याचिकाएं खारिज की थीं।

न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के गत 12 जून के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश में दखल देने से इन्कार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को जो कहना है हाई कोर्ट में जाकर कहें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह मामले को जल्द से जल्द दो महीने के भीतर निपटाए। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट के 12 जून के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उस आदेश में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का विवाद यूजीसी की विशेषज्ञ समिति को भेजने और भर्ती पर अंतरिम रोक लगाने का एकल पीठ का आदेश स्थगित कर दिया थ। साथ ही प्रदेश सरकार को भर्ती जारी रखने की हरी झंडी दे दी थी। मुख्य मामला अभी भी खंडपीठ के समक्ष विचाराधीन है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने एकल पीठ के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती परीक्षा की जारी उत्तर पुस्तिकाओं में चार प्रश्न गलत हैं। मामले को जांच के लिए यूजीसी की विशेषज्ञ समिति को भेजने का एकल पीठ का आदेश सही था। तभी उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और राकेश मिश्र ने पीठ से कहा कि सुप्रीम कोर्ट इसी तरह की याचिका पहले खारिज कर चुका है। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से सवाल किया कि आप कौन हैं और इस मामले में कैसे प्रभावित हो रहे हैं। क्या आप शिक्षामित्र हैं। वकील ने कहा कि हां मेरा मुवक्किल शिक्षामित्र है। इस पर पीठ ने फिर कहा कि इस भर्ती में 8000 शिक्षामित्रों की भर्ती हो रही है बाकी के 37339 शिक्षामित्रों के लिए पद रोक कर रखे गए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह आप तो सुरक्षित हैं तो फिर क्या आपकी मानसिकता है कि भर्ती न होने दें। तभी एक अन्य वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल बीटीसी अभ्यर्थी है और वह सिर्फ एक नंबर से परीक्षा में रह गया है। इस पर पीठ ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आदेश और राहत शिक्षामित्रों को ध्यान में रखकर दी थी। कोर्ट ने याचिकाओं पर विचार करने से इन्कार करते हुए याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे ये सब बातें हाई कोर्ट के समक्ष रखें।

’>>उत्तर पुस्तिकाओं में खामियों के आधार पर की थी भर्ती पर रोक लगाने की मांग

याचिकाकर्ताओं को जो कहना है हाई कोर्ट में जाकर कहें। हाई कोर्ट भी इस मामले को जल्द से जल्द दो महीने के भीतर निपटाए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

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