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ठिठुर रहे नौनिहाल, सत्यापन कराने में परेशान है बेसिक शिक्षा विभाग

 ठिठुर रहे नौनिहाल, सत्यापन कराने में परेशान है बेसिक शिक्षा विभाग

प्रतापगढ़:- ठंड का असर तेज होने के बाद परिषदीय विद्यालयों में नौनिहाल ठिठुर रहे हैं और बेसिक शिक्षा विभाग उन्हें स्वेटर और जूता-मोजा के लिए धनराशि नहीं उपलब्ध करा सका है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक अकाउंट में डीबीटी प्रणाली से जूता, मोजा व स्वेटर के लिए 11 सौ रुपये की धनराशि भेजने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अभी जिले के ढाई लाख बच्चों में मात्र 95 हजार छात्र-छात्राओं को ही लाभ मिल सका है।
शासन की ओर से जनपद के कुल 2376 प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले कुल ढाई लाख छात्र-छात्राओं को जूता, मोजा व ठंड से राहत के लिए दो जोड़ी स्वेटर की धनराशि 11 सौ रुपये डीबीटी प्रणाली (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) से अभिभावकों के खाते में भेजी जा रही है। पहले चरण में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अभिभावकों के बैंक अकाउंट व छात्र-छात्राओं के आधारकार्ड का सत्यापन कर 95 हजार बच्चों के लिए रकम भेज दी।


इससे करीब 40 प्रतिशत बच्चों को ठंड के समय में जूता, मोजा व स्वेटर मिल गया है। सत्यापन न होने से एक लाख 55 हजार बच्चों के अभिभावकों के खाते में अभी धनराशि नहीं भेजी जा सकी है। इससे अभिभावक बच्चों के लिए जूता-मोजा और स्वटेर नहीं खरीद सके हैं। बच्चे रोजाना ठंड में सुबह ठिठुरते हुए स्कूल आ रहे हैं।
सत्यापन कराने में परेशान हैं गुरुजी
प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को स्वेटर, जूता व मोजा की धनराशि देने के लिए गुरुजी उनके घर के चक्कर लगाकर परेशान हो रहे हैं। बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों का दबाव देख नौनिहालों के अभिभावकों के बैंक अकाउंट नंबर के साथ सूची तैयार कर गुरुजी बीएसए कार्यालय पहुंचा रहे हैं। अधिकांश बच्चों को जल्दी स्वेटर सहित जूता व मोजा मिल जाए, इसके लिए प्रत्येक विद्यालय के शिक्षकों को सत्यापन की जिम्मेदारी मिली है। स्कूल में शिक्षकों की मनमानी के चलते अब तक अधिकांश बच्चों को स्वेटर, जूता व मोजा नहीं मिला है।
बैंक अकाउंट नंबर आधार से लिंक नहीं होने से परेशानी
प्राथमिक विद्यालयों के अधिकांश बच्चों के अभिभावकों ने जनधन अकाउंट का नंबर बेसिक शिक्षा विभाग को दिया है। समय पर इस अकाउंट को आधारकार्ड से लिंक नहीं कराया गया है। ऐसे में डीबीटी प्रणाली से भेजी गई धनराशि अकाउंट में फंसी हैं। ऐसे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को बैंक अकाउंट के दस्तावेज बैंक में जमा कराने की जानकारी शिक्षक ही दे रहे हैं। बच्चों के अभिभावक भी बैंक अकाउंट का सत्यापन कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे नौनिहालों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।


अब तक लगभग 95 हजार छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक अकाउंट में डीबीटी प्रणाली से धनराशि भेजी गई है। अधिकांश अभिभावकों के बैंक अकाउंट में त्रुटि है। खाते आधारकार्ड से लिंक नहीं हैं। सत्यापन कार्य में शिक्षकों को लगाया गया है। सुधीर सिंह, प्रभारी बीएसए

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