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यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नहीं रहे, राज्य में तीन दिन का शोक, 23 को सार्वजनिक अवकाश

 यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नहीं रहे, राज्य में तीन दिन का शोक, 23 को सार्वजनिक अवकाश

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का एक लंबी बीमारी के बाद शनिवार को निधन हो गया। उन्हें चार जुलाई को संजय गांधी पीजीआइ के क्रिटिकल केयर मेडिसिन कीआइसीयू में गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के धीरे-धीरे फेल होने के कारण शनिवार रात 9:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। कल्याण सिंह तबीयत खराब होने के कारण तभी से इसी अस्पताल में भर्ती थे। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने हर दिन उनके स्वास्थ्य का हाल लिया और उनके निर्देश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार निगरानी करते रहे।

भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक कल्याण सिंह का पार्टी के साथ ही भारतीय राजनीति में कद काफी विशाल था। अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। राम मंदिर आंदोलन के नायकों में से एक कल्याण सिंह का जन्म पांच जनवरी 1932 को अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम तेजपाल लोधी और माता का नाम सीता देवी था। कल्याण सिंह ने दो बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला। अतरौली विधानसभा से जीतने के साथ ही वह बुलंदशहर तथा एटा से लोकसभा सदस्य भी रहे। वह राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करने के बाद कल्याण सिंह ने लखनऊ में आकर एक बार फिर से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

कल्याण सिंह 1993 में अतरौली तथा कासगंज से विधायक निर्वाचित हुए। इन चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। इसके बाद भाजपा ने बसपा के साथ गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। तब कल्याण सिंह सितंबर 1997 से नवंबर 1999 में एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। गठबंधन की सरकार में मायावती पहले मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन जब भाजपा की बारी आई तो उन्होंने समर्थन वापस ले लिया। बसपा की चाल भांप चुके कल्याण सिंह पहले से ही कांग्रेस विधायक नरेश अग्रवाल के संपर्क में थे और उन्होंने नरेश के साथ आए विधायकों की पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन कराया 21 विधायकों का समर्थन दिलाया। कल्याण सिंह ने किसी बात पर खिन्न होकर दिसंबर 1999 में भाजपा छोड़ दी। उन्होंने अपनी पार्टी बना ली और मुलायम सिंह यादव के साथ भी जुड़ गए। करीब पांच वर्ष बाद जनवरी 2003 में उनकी भाजपा में वापसी हो गई। भाजपा ने 2004 लोकसभा चुनाव में उनको बुलंदशहर से प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की।

लखनऊ: पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन की सूचना पाते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पार्टी के कई वरिष्ठ मंत्री और नेता पीजीआइ पहुंच गए। वहां से पार्थिव देह को स्वजन माल एवेन्यू स्थित उनके आवास पर ले आए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने तीन दिन के राजकीय शोक और 23 अगस्त को एक दिन के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की। भाजपा ने भी अपने तीन दिन के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं।

दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी लखनऊ आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री के आवास पर रात 11.30 बजे मंत्रिपरिषद की आपात बैठक में शोक प्रस्ताव पारित किया गया। रविवार को कल्याण सिंह की पार्थिव देह 11 से एक बजे तक विधान भवन और उसके बाद तीन बजे तक भाजपा मुख्यालय में रखी जाएगी। यहां श्रद्धांजलि के बाद अपराह्न साढ़े तीन बजे के आसपास पार्थिव शरीर को एयरपोर्ट ले जाया जाएगा। जहां से एयर एंबुलेंस से अलीगढ़ ले जाया जाएगा। वहां भी देह को जनता दर्शन के लिए स्टेडियम में रखा जाएगा। सोमवार को अलीगढ़ के अतरौली में पार्थिव देह को जनता के दर्शनार्थ रखा जाएगा। शाम को नरोरा में गंगा के किनारे पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।




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