शिक्षामित्रों को मानदेय का संकट, डेढ़ लाख शिक्षामित्रों को तीन माह के मानदेय भुगतान का इंतजार

शिक्षामित्रों को मानदेय का संकट, डेढ़ लाख शिक्षामित्रों को तीन माह के मानदेय भुगतान का इंतजार

यागराज : कोरोना संक्रमण के दौरान शिक्षामित्रों का नया रूप सामने आया है। वह केवल छात्र-छात्रओं की पढ़ाई ही नहीं करा रहे, बल्कि लोग स्वस्थ रहें इसका भी जतन कर रहे हैं। कोरोना योद्धा के रूप में कार्य करने वाले शिक्षामित्रों को तीन माह का मानदेय नहीं मिल सका है। इससे जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। उन्हें जून माह का मानदेय भुगतान होगा भी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

प्रदेश में करीब डेढ़ लाख से अधिक शिक्षामित्र तैनात हैं। अधिकांश जिलों में डीएम के आदेश पर शिक्षामित्रों को जून माह में सरकारी राशन की दुकानों पर नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया। पिछले वर्ष तक सरकार शिक्षामित्रों को जून माह का मानदेय नहीं दे रही है। ज्ञात हो कि शीर्ष कोर्ट के आदेश पर सरकार अगस्त 2018 से शिक्षामित्रों को संविदाकर्मी के रूप में 11 माह तक दस हजार रुपये प्रति माह देती रही है, जबकि पहले समायोजित शिक्षामित्रों को करीब 40 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता था।

इधर, शिक्षामित्रों को नए तरीके से मानदेय भुगतान होना है। इससे उन्हें जून, जुलाई व अगस्त माह का मानदेय नहीं मिल सका है, हालांकि सरकार ने जुलाई माह का भुगतान करने के लिए धन जारी कर दिया है लेकिन, तकनीक तैयार न होने से उन्हें भुगतान नहीं हो पा रहा है। वहीं, जून माह के भुगतान पर असमंजस बना है। प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 20 वर्षो से एक शिक्षक के समान शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षामित्रों व उनके परिजनों की जिंदगी बदहाल है। वजह केवल तीन माह से मानदेय न मिलना ही नहीं है। बल्कि शिक्षामित्रों को समय पर मानदेय न मिलना आम बात है।


वादे के बाद भी भुगतान नहीं

शिक्षामित्र संघ उप्र के संयोजक शिवपूजन सिंह ने जून माह के मानदेय की मांग प्रदेश सरकार से किया था। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया, किंतु शिक्षामित्रों को जून माह का मानदेय नहीं मिला है।

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