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सरकारी विद्यालयों में शिक्षामित्र और शिक्षाकर्मी की भर्ती बंद होगी: जानिए नई शिक्षा नीति में क्या है खास

सरकारी विद्यालयों में शिक्षामित्र और शिक्षाकर्मी की भर्ती बंद होगी: जानिए नई शिक्षा नीति में क्या है खास

प्री-प्राइमरी से उच्च शिक्षा तक आमूलचूल बदलाव के मसौदे के साथ जारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 के ड्राफ्ट में शिक्षा में बड़े बदलावों पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 की इस रूपरेखा ड्राफ्ट शुक्रवार को जारी कर दिया गया।

देशभर के स्कूलों में 2022 तक पैरा टीचर की प्रैक्टिस पूरी तरह से खत्म कर दी जाएगी। स्कूलों में स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति होगी। देश में घटिया और केवल डिग्री बांट रहे टीचर एजुकेशन इंस्टीट्यूट बंद होंगे।  2030 से शिक्षक बनने की न्यूनतम अर्हता चार वर्षीय बीएड रहेगी।


मेधावियों को शिक्षण पेशे में लाने के लिए सरकार प्रोत्साहन के लिए मेरिट आधारित स्कॉलरशिप देगी। इसमें 10वीं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बड़ी संख्या में स्कॉलरशिप दी जाएगी।  शिक्षकों को स्कूलों में अब पढ़ाई के अलावा सारे कामों से मुक्त किया जाएगा। शिक्षक बिना पूर्व अनुमति के छुट्टी नहीं लेंगे। इसके अलावा सेकेंडरी स्तर पर छात्रों को एक कोर्स भारतीय ज्ञान व्यवस्था पर उपलब्ध कराया जाएगा।

माध्यमिक तक अनिवार्य होगा टीईटी
सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) और एनटीए परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। बुनियादी, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक भी टीईटी के दायरे में आएगी। अतिरिक्त विषय शिक्षकों की भर्ती को एनटीए की परीक्षा पास करनी होगी।

तीन वर्ष का होगा शिक्षकों का प्रोबेशनल काल
शिक्षा नीति में सभी स्तरों पर शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए एक टेन्योर ट्रैक सिस्टम स्थापित करने का प्रस्ताव है। इस सिस्टम में टीचर को तीन वर्ष के प्रोबेशन पीरियड पर रखा जाएगा। इसके बाद उसके प्रदर्शन पर उसे स्थाई किया जाएगा।

2022 तक स्कूलों में होंगी सभी सुविधाएं
ड्राफ्ट के अनुसार 2022 तक सभी स्कूलों में निर्धारित मानकों के अनुसार जरूरी सुविधाएं, सुरक्षित और अच्छे सीखने का वातावरण तैयार कर लिया जाएगा। निर्माण और रखरखाव के लिए फंड की व्यवस्था केंद्र एवं राज्य सरकारें मिलकर करेंगी।

शिक्षकों का अनावश्यक ट्रांसफर नहीं, सात वर्ष रुकेंगे
शिक्षक-छात्र समुदाय के संबंधों की निरंतरता तय करने के लिए शिक्षकों के तबादलों को रोकना और कम करने का प्रस्ताव भी है। शिक्षकों के तबादले स्कूल कॉप्लेक्स के बाहर नहीं करने का सुझाव दिया गया है। स्कूल कॉम्पलेक्स क्षेत्र विशेष में अनेक स्कूलों का समूह होगा। शिक्षकों का कार्यकाल किसी एक स्कूल में पांच से सात साल प्रस्तावित है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन
उत्कृष्ट शिक्षकों को ग्रामीण, आदिवासीय और दूरस्थ इलाकों में शिक्षण कार्य के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसमें ऐसे शिक्षकों को स्कूल कैंपस के निकट ही आवास उपलब्ध कराने का सुझाव है।
हजारों शिक्षण संस्थानों पर लगेगा ताला
टीचर एजुकेशन की प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए देशभर में हजारों रद्दी और केवल डिग्री बांट रहे एकल शिक्षक शिक्षा संस्थानों (स्टैंडअलोन टीचर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन) को जल्द बंद कर दिया जाएगा।
बच्चों की प्रतिभा विकसित करने को स्कूल-कॉप्लेक्स
पूरे देश में विद्यार्थियों में क्षेत्र विशेष में रुचि और प्रतिभा के विकास के लिए स्कूल कॉम्प्लेक्स, ब्लॉक एवं जिले स्तर पर मुद्दे एवं प्रोजेक्ट आधारित क्लब बनेंगे। इसमें गणित, विज्ञान, संगीत,  काव्य, भाषा, साहित्य, वाद-विवाद एवं खेल शामिल होंगे।

कॉलेज, विवि प्रवेश परीक्षा कराएगी एनटीए
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को और मजबूत करने का प्रस्ताव है।  एनटीए 2020 से अलग-अलग विषयों के टेस्ट और एप्टीट्यूड टेस्ट भी शुरू करेगी। ये टेस्ट वर्षभर में कई बार आयोजित होंगे। यह टेस्ट विवि और कॉलेजों में प्रवेश परीक्षा का विकल्प होंगे।

कक्षा तीन, पांच और आठ में सेंसस परीक्षाएं
नई शिक्षा नीति में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के अतिरिक्त कक्षा तीन, पांच और आठ में राज्यों द्वारा सेंसस परीक्षाएं कराने का भी सुझाव है। ये सभी परीक्षाएं बच्चों के स्तर के अनुसार होंगी। ये परीक्षा मूल अवधाराणाओं के बारे में स्पष्टता, उच्च स्तरीय कौशल और इनके जीवन में प्रयोग आदि की जांच करेगी। कक्षा तीन की सेंसस परीक्षा बच्चों में साक्षरता, संख्या ज्ञान और बुनियादी कौशलों का पता लगाएगी।
छात्रों को नीतिपरक, नैतिक चिंतन में एक वर्ष का कोर्स
ग्रेड छह से आठ के दौरान विद्यार्थियों को नीतिपरक और नैतिक चिंतन में एक साल कोर्स करने का प्रस्ताव है। हाईस्कूल में इससे भी ऊंचे स्तर का सेमेस्टर कोर्स दर्शन,नीतिशास्त्र और नैतिक चिंतन पर उपलब्ध कराया जाए

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